साल 2026 की शुरुआत चांदी के बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। हाल ही में रिकॉर्ड स्तर से तेज गिरावट देखने के बाद अब चांदी की कीमतों में फिर से मजबूती नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 जनवरी को सिल्वर का स्पॉट प्राइस 72.58 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया, जिसमें एक ही दिन में 2.22% की तेजी देखने को मिली।
क्यों टूटी थी चांदी की कीमत?
पिछले कुछ सत्रों में चांदी पर मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला था। रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे कीमतों में करीब 8% तक की गिरावट आई। इसके अलावा साल के अंत में कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और डॉलर में हल्की मजबूती ने भी चांदी पर दबाव बनाया।
आज चांदी में तेजी के पीछे ये कारण
- कम कीमतों पर खरीदारी: गिरावट के बाद निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की
- औद्योगिक मांग का सपोर्ट: इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से मजबूत डिमांड
- फेड रेट कट की उम्मीदें: 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं कीमती धातुओं को सपोर्ट दे रही हैं
- डॉलर में कमजोरी: डॉलर इंडेक्स में नरमी से चांदी को सहारा मिला
आगे क्या है आउटलुक?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अल्पकाल में चांदी में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, लेकिन लंबे समय के लिए इसके फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं। अगर ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता और इंडस्ट्रियल डिमांड बनी रहती है, तो चांदी दोबारा ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ सकती है।
👉 निवेशकों के लिए सलाह: ऊंचे स्तरों पर एकमुश्त निवेश से बचें और गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा सुरक्षित रणनीति हो सकती है।
