12 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 950 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी करीब 300 अंक गिरकर 23,600 के नीचे पहुंच गया। लगातार दूसरे दिन आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर कई घरेलू और वैश्विक कारणों का दबाव है।
बाजार गिरने के 6 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार चला गया है। इससे भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है और बाजार का सेंटीमेंट कमजोर होता है।
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली (FII Selling)
विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे बाजार में लिक्विडिटी घटती है और दबाव बढ़ता है।
3. कमजोर ग्लोबल संकेत
अमेरिका और यूरोप के बाजारों में गिरावट तथा बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
4. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ती है और बाजार में बिकवाली तेज हो सकती है।
5. मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी गिरावट
बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने से निवेशक मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे व्यापक बाजार भी दबाव में है।
6. मुनाफावसूली (Profit Booking)
पिछले महीनों में आई तेजी के बाद कई निवेशक मुनाफा बुक कर रहे हैं, जिससे बाजार में गिरावट तेज हुई है।
किन सेक्टरों पर ज्यादा असर
- बैंकिंग
- IT
- मेटल
- ऑटो
- रियल्टी
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई।
आगे क्या देखें?
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों की नजर अब इन चीजों पर रहेगी:
- कच्चे तेल की कीमतें
- विदेशी निवेशकों का रुख
- रुपये की चाल
- ग्लोबल मार्केट ट्रेंड
अगर इन कारकों में सुधार नहीं हुआ, तो बाजार में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष:
तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है, जिसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिल रही है।
