आज पौष मास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर शाकंभरी जयंती मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां शाकंभरी का अवतार हुआ था। मां शाकंभरी को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और उन्हें कृषि, अन्न और प्रकृति की देवी के रूप में पूजा जाता है।
कौन हैं मां शाकंभरी?
पुराणों के अनुसार, जब धरती पर भयंकर अकाल पड़ा था और अन्न का संकट उत्पन्न हो गया था, तब मां दुर्गा ने शाकंभरी देवी के रूप में अवतार लिया। उन्होंने अपने शरीर से शाक-सब्जियों और फलों की उत्पत्ति कर जीवों का पालन किया। इसी कारण मां शाकंभरी को अन्नदाता और प्रकृति की संरक्षिका कहा जाता है।
शाकंभरी जयंती का धार्मिक महत्व
शाकंभरी जयंती का विशेष महत्व किसानों और प्रकृति से जुड़े लोगों के लिए माना जाता है। इस दिन मां की पूजा करने से
- अन्न की कभी कमी नहीं होती
- कृषि कार्यों में सफलता मिलती है
- घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है
Shakambhari Purnima 2026: पूजा मुहूर्त
- पौष पूर्णिमा तिथि: आज
- पूजा का शुभ समय: प्रातः काल से दोपहर तक
(स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है)
शाकंभरी जयंती पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थल को साफ कर मां शाकंभरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- मां को फल, सब्जियां, हरी पत्तियां, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें
- शाकंभरी स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
- अंत में आरती करें और मां से अन्न, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें
क्या करें और क्या न करें
- इस दिन सात्विक भोजन करें
- जरूरतमंदों को अन्न या फल-सब्जी का दान करें
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
शाकंभरी जयंती का संदेश
शाकंभरी जयंती हमें प्रकृति, अन्न और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देती है। मां शाकंभरी की पूजा से जीवन में संतुलन, पोषण और समृद्धि आती है।
