दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट केस में नए खुलासे ने मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, आतंकी डॉ. उमर-उन-नबी जो विस्फोटकों से लदी कार चला रहे थे, धमाके में मारे गए। इस हमले में कुल 15 लोगों की मौत हुई थी।
जांच में सामने आया कि आतंकियों ने ‘घोस्ट सिम’ और ‘दो फोन’ प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए किया गया।
साथ ही, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने इन डॉक्टरों को यूट्यूब के जरिए IED असेंबली की ट्रेनिंग दी थी। यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी है कि आतंकवादी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर जटिल हमले योजनाओं में महारत हासिल कर रहे हैं।
मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच करके आतंकियों के नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब किया जाएगा।
