मुख्य बातें (FY25):
- डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ: शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों (SCBs) में डबल डिजिट रही, हालांकि FY24 से थोड़ी कम।
- कैपिटल पर्याप्तता (CRAR):
- मार्च: 17.4%
- सितंबर: 17.2% — मजबूत कैपिटल बफर बरकरार।
- एसेट क्वालिटी:
- ग्रॉस NPA मार्च में 2.2%, सितंबर में 2.1% — कई दशकों का निचला स्तर।
- प्रॉफिटबिलिटी:
- RoA: 1.4%, RoE: 13.5% — मुनाफाखोरी मजबूत।
- अन्य सेगमेंट्स:
- अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों में बैलेंस शीट ग्रोथ और चौथे साल लगातार एसेट क्वालिटी सुधार।
- NBFCs में डबल डिजिट क्रेडिट ग्रोथ, मजबूत कैपिटल और बेहतर एसेट क्वालिटी।
इसका मतलब क्या है?
- बैंकिंग सिस्टम स्थिर और लचीला है, क्रेडिट साइकिल हेल्दी बनी हुई है।
- कम NPAs और मजबूत कैपिटल से जोखिम घटा, आगे ग्रोथ को सपोर्ट।
- निवेशकों के लिए बड़े बैंक/NBFCs में मध्यम अवधि का आउटलुक सकारात्मक, हालांकि वैल्यूएशन और क्रेडिट ग्रोथ की गति पर नजर जरूरी।
अगर चाहें तो मैं PSU बनाम प्राइवेट बैंकों का तुलनात्मक आउटलुक या निवेश रणनीति (शॉर्ट/मीडियम टर्म) भी समझा सकता हूँ।
