अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की कीमतें इस समय अपने ऑल-टाइम हाई के करीब बनी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियों ने सोने को मजबूत सहारा दिया है। खासतौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत कई बड़े सेंट्रल बैंकों द्वारा 2026 में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से गोल्ड की चमक और बढ़ी है।
कम ब्याज दरों के माहौल में सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में उभरता है, क्योंकि इससे बॉन्ड और डॉलर जैसी परिसंपत्तियों की आकर्षण क्षमता घटती है। इसके अलावा, सेंट्रल बैंकों की ओर से लगातार सोने की खरीद, वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं भी कीमतों को सपोर्ट दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 2026 में वास्तव में दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होता है और वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने में तेजी का रुझान आगे भी जारी रह सकता है। ऐसे में गोल्ड आने वाले समय में भी निवेशकों के पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
