पिछले सत्र में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद गुरुवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) किए जाने और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ हद तक नरमी आने से सोने की सेफ-हेवन मांग कमजोर हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
क्यों टूटा सोना?
बीते कुछ हफ्तों से सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। वैश्विक अनिश्चितता, युद्ध जैसे हालात और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों ने सोने को सपोर्ट दिया था। हालांकि, रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में दबाव आया।
इसके अलावा, हालिया दिनों में कुछ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के चलते जियोपॉलिटिकल रिस्क कम होता दिख रहा है, जिससे सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने की मांग घट गई।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार का हाल
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड में कमजोरी देखने को मिली
- घरेलू वायदा बाजार (MCX) में भी सोने के भाव फिसले
- डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में हल्की तेजी ने भी सोने पर दबाव बनाया
एक्सपर्ट्स की राय
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को टेक्निकल करेक्शन के तौर पर देखा जा सकता है। लंबी अवधि में सोने का आउटलुक अब भी मजबूत बना हुआ है, क्योंकि:
- फेड की ओर से आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
- वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका
- केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने में खरीद
आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भू-राजनीतिक तनाव दोबारा बढ़ता है या फेड से नरम संकेत मिलते हैं, तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी लौट सकती है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
- शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव से सावधान रहें
- लॉन्ग टर्म निवेशक गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी पर विचार कर सकते हैं
- पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना जरूरी
निष्कर्ष:
रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने में आई मौजूदा गिरावट मुनाफावसूली और सेफ-हेवन डिमांड घटने का नतीजा है। हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से सोना अब भी निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बना हुआ है।
