Asia PacificBlogInvestingPersonal FinanceStock MarketUnited States

Budget 2026: रत्न और आभूषणों पर ड्यूटी हो तर्कसंगत, GST में मिले राहत; ज्वैलरी सेक्टर ने वित्त मंत्री को सौंपी विशलिस्ट

आम बजट 2026 से पहले जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर भारत को वैश्विक स्तर पर ज्वैलरी हब बनाना है और निर्यात को रफ्तार देनी है, तो कस्टम ड्यूटी, GST और टैक्स स्ट्रक्चर में जरूरी सुधार करने होंगे।

GJEPC की प्रमुख मांगें

जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने अपने प्री-बजट सुझावों में कहा है कि:

  • रत्न और आभूषणों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाया जाए
  • सोने, चांदी और कीमती पत्थरों पर उच्च शुल्क के कारण लागत बढ़ रही है, जिससे भारतीय निर्यात वैश्विक बाजार में महंगा पड़ता है
  • ड्यूटी में कटौती से एक्सपोर्ट अधिक कॉम्पिटिटिव बन सकता है

GJEPC का मानना है कि इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ विदेशी मुद्रा आय में भी इजाफा होगा।

GST में कटौती की मांग

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (AIGJDC) ने घरेलू ज्वैलरी कारोबार से जुड़ी समस्याओं को उठाया है। काउंसिल की प्रमुख मांगें हैं:

  • ज्वैलरी पर लगने वाले 3% GST को घटाया जाए
  • GST नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे कारोबारियों को राहत मिले
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी दिक्कतों को दूर किया जाए

हॉलमार्किंग और डायरेक्ट टैक्स पर सुझाव

उद्योग ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि:

  • हॉलमार्किंग नियमों को ज्यादा लचीला और व्यावहारिक बनाया जाए
  • छोटे ज्वैलर्स को अनुपालन (compliance) में सहूलियत दी जाए
  • डायरेक्ट टैक्स स्ट्रक्चर में सुधार कर ज्वैलरी कारोबार को औपचारिक अर्थव्यवस्था से और मजबूती से जोड़ा जाए

क्यों अहम हैं ये मांगें?

जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर:

  • भारत के सबसे बड़े रोजगार देने वाले उद्योगों में से एक है
  • देश के कुल निर्यात में इसका बड़ा योगदान है
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा, ऊंची लागत और टैक्स बोझ के कारण हाल के वर्षों में दबाव में रहा है

उद्योग का मानना है कि अगर Budget 2026 में इन सुझावों पर ध्यान दिया गया, तो भारत ग्लोबल ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड हब के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

निष्कर्ष

Budget 2026 से ज्वैलरी सेक्टर को:

  • ड्यूटी में तर्कसंगत कटौती
  • GST में राहत
  • टैक्स और हॉलमार्किंग नियमों में सुधार

की उम्मीद है। अब देखना होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट में इस पारंपरिक लेकिन निर्यात-उन्मुख उद्योग को कितनी राहत देती हैं।

Related posts

Here’s a blog-friendly rewrite in a clear and professional news style:

Uttam

HDFC AMC, Canara Robeco Shares Jump Up to 8.5% After SEBI Revises Mutual Fund Expense Ratios

Uttam

Weak Market Debut: Admach Systems Shares List at 20% Discount to SME IPO Price

Uttam

Leave a Comment