अटलांटिक महासागर में रूस और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक प्रतिबंधित रूसी तेल टैंकर को सुरक्षित निकालने के लिए रूस ने अपनी पनडुब्बी तैनात कर दी है, जिससे समुद्र में टकराव जैसे हालात बन गए हैं।
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर फिलहाल आइसलैंड से करीब 300 मील दक्षिण अटलांटिक महासागर में मौजूद है और रूस के मुर्मान्स्क बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर अवैध रूप से तेल की सप्लाई के लिए किया जाता है।
‘शैडो फ्लीट’ को लेकर अमेरिका सख्त
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि रूस पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद पुराने और कम-रेगुलेटेड टैंकरों का नेटवर्क चला रहा है, जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है। इन्हीं जहाजों के जरिए रूस प्रतिबंधों के बावजूद वैश्विक बाजार में तेल भेज रहा है। अमेरिका इस टैंकर को जब्त करने या रोकने की कोशिश कर रहा था।
रूस ने दिखाई सैन्य ताकत
इसी बीच रूस द्वारा पनडुब्बी की तैनाती को एक बड़ा और आक्रामक कदम माना जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ टैंकर की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका को सीधा संदेश देने के लिए भी है कि रूस अपने ऊर्जा हितों पर किसी भी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा।
बढ़ सकता है जियोपॉलिटिकल तनाव
इस घटनाक्रम ने पहले से ही यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों से तनावग्रस्त रूस-अमेरिका संबंधों को और जटिल बना दिया है। अगर समुद्र में किसी तरह की सीधी भिड़ंत या इंटरसेप्शन होती है, तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट और शिपिंग रूट्स पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि अटलांटिक महासागर में चल रहा यह टकराव कूटनीतिक दबाव तक सीमित रहता है या किसी बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।
